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पांडव लेणी
मंदिर

पांडव लेणी

पांडव लेणी, जिन्हें त्रिरश्मि गुफाएँ भी कहा जाता है, महाराष्ट्र के नासिक के पास त्रिरश्मि पहाड़ी पर स्थित २४ प्राचीन बौद्ध शैलकृत गुफाओं का समूह है। इन गुफाओं का निर्माण ईसा पूर्व पहली शताब्दी से लेकर ईस्वी तीसरी शताब्दी के बीच किया गया था। ये गुफाएँ पश्च

स्थान: त्रिरश्मि पहाड़ी, नासिक शहर से लगभग ८ किलोमीटर दक्षिण में।
कालखंड: ईसा पूर्व पहली शताब्दी से ईस्वी तीसरी शताब्दी तक।
गुफाओं की संख्या: २४।
प्रमुख विशेषताएँ:
- विहार (बौद्ध भिक्षुओं के निवास स्थान एवं सभागृह)।
- चैत्यगृह (प्रार्थना सभागृह)।
- स्तूप।
- प्राचीन शिलालेख।
रखरखाव एवं प्रबंधन: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI)।
इतिहास एवं उत्पत्ति
'पांडव लेणी' नाम होने के बावजूद इन गुफाओं का महाभारत के पांडवों से कोई ऐतिहासिक संबंध नहीं है। 'पांडव लेणी' (पांडवों की गुफाएँ) नाम बाद के समय की लोककथाओं के कारण प्रचलित हुआ।
इन गुफाओं के निर्माण को मुख्य रूप से सातवाहन और पश्चिमी क्षत्रप राजवंशों के शासनकाल में संरक्षण प्राप्त हुआ। दक्कन क्षेत्र में बौद्ध धर्म के विस्तार को बढ़ावा देने वाले व्यापारियों और तत्कालीन शासकों के आर्थिक एवं धार्मिक सहयोग की झलक इन गुफाओं में दिखाई देती है।
यहाँ ब्राह्मी और प्राचीन देवनागरी लिपियों में लिखे शिलालेख मिलते हैं, जिनमें अधिकारियों, बौद्ध भिक्षुओं और सामान्य श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का उल्लेख मिलता है।
पांडव लेणी, मुंबई-आगरा राजमार्ग, त्रिरश्मि पहाड़ी, बुद्ध विहार के पास, पाथर्डी फाटा, नासिक, महाराष्ट्र – ४२२०१०
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