मंदिर
नारोशंकर मंदिर
यह मंदिर मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित है और भक्तों के लिए इसका अत्यंत धार्मिक महत्व है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि के पर्व पर यहाँ हजारों श्रद्धालु दर्शन, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए एकत्रित होते हैं। पंचवटी के पवित्र घाटों के पास गोदावरी नदी क
मंदिर और घाट
निर्माण: पेशवाओं के शासनकाल में मराठा सरदार और सामंत सरदार नरोशंकर राजेबाहाद्दुर ने ईस्वी १७४७ में इस मंदिर का निर्माण करवाया था।
- वास्तुकला: मंदिर का निर्माण विशिष्ट 'माया' शैली में किया गया है। इस शैली पर पारंपरिक हेमाडपंथी और मराठा मंदिर स्थापत्य कला का प्रभाव दिखाई देता है।
- बाहरी नक्काशी: मंदिर एक ऊँचे चबूतरे पर बना हुआ है। इसके बाहरी पत्थरों पर बेहद सुंदर और बारीक नक्काशी की गई है। इसमें सजावटी जालीदार नक्काशी और मोतियों की मालाएँ धारण किए हुए मोरों की कतारें देखने को मिलती हैं।
- मूर्तियाँ और छतरियाँ: मंदिर की चारों दिशाओं में पद्मासन (कमल की मुद्रा) में बैठे संतों की मूर्तियाँ हैं। मंदिर के चारों कोनों पर पहले 'मेघडंबरी' या 'बारसाती' नाम की सुंदर खुले गुंबदनुमा छतरियाँ हुआ करती थीं। इनमें से आज तीन छतरियाँ मौजूद हैं, जबकि एक गोदावरी नदी की बाढ़ में बह गई थी।
- चारदीवारी: मंदिर परिसर के चारों ओर लगभग ११ फीट ऊँची पत्थर की चारदीवारी बनी हुई है।
प्रसिद्ध नरोशंकर घंटा
- इतिहास: मंदिर के सामने नदी किनारे स्थित प्रवेश द्वार के पास कांस्य धातु का एक विशाल घंटा है। इसे 'नरोशंकर घंटा' के नाम से जाना जाता है। ईस्वी १७३९ में चिमाजी अप्पा (पहले पेशवा बाजीराव के भाई) के नेतृत्व में मराठों ने वसई किले में पुर्तगालियों पर विजय प्राप्त की थी। इसी विजय की स्मृति में यह घंटा यहाँ स्थापित किया गया था। इस अभियान में नरोशंकर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
- विशेषताएँ: इस घंटे का व्यास लगभग ६ फीट है और इस पर ईस्वी १९२१ अंकित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, पहले इस घंटे की आवाज लगभग ५ मील (५ किलोमीटर) दूर तक सुनाई देती थी।
- वास्तुकला: मंदिर का निर्माण विशिष्ट 'माया' शैली में किया गया है। इस शैली पर पारंपरिक हेमाडपंथी और मराठा मंदिर स्थापत्य कला का प्रभाव दिखाई देता है।
- बाहरी नक्काशी: मंदिर एक ऊँचे चबूतरे पर बना हुआ है। इसके बाहरी पत्थरों पर बेहद सुंदर और बारीक नक्काशी की गई है। इसमें सजावटी जालीदार नक्काशी और मोतियों की मालाएँ धारण किए हुए मोरों की कतारें देखने को मिलती हैं।
- मूर्तियाँ और छतरियाँ: मंदिर की चारों दिशाओं में पद्मासन (कमल की मुद्रा) में बैठे संतों की मूर्तियाँ हैं। मंदिर के चारों कोनों पर पहले 'मेघडंबरी' या 'बारसाती' नाम की सुंदर खुले गुंबदनुमा छतरियाँ हुआ करती थीं। इनमें से आज तीन छतरियाँ मौजूद हैं, जबकि एक गोदावरी नदी की बाढ़ में बह गई थी।
- चारदीवारी: मंदिर परिसर के चारों ओर लगभग ११ फीट ऊँची पत्थर की चारदीवारी बनी हुई है।
प्रसिद्ध नरोशंकर घंटा
- इतिहास: मंदिर के सामने नदी किनारे स्थित प्रवेश द्वार के पास कांस्य धातु का एक विशाल घंटा है। इसे 'नरोशंकर घंटा' के नाम से जाना जाता है। ईस्वी १७३९ में चिमाजी अप्पा (पहले पेशवा बाजीराव के भाई) के नेतृत्व में मराठों ने वसई किले में पुर्तगालियों पर विजय प्राप्त की थी। इसी विजय की स्मृति में यह घंटा यहाँ स्थापित किया गया था। इस अभियान में नरोशंकर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
- विशेषताएँ: इस घंटे का व्यास लगभग ६ फीट है और इस पर ईस्वी १९२१ अंकित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, पहले इस घंटे की आवाज लगभग ५ मील (५ किलोमीटर) दूर तक सुनाई देती थी।
कैसे पहुंचें
नारोशंकर मंदिर, पंचवटी, नाशिक, महाराष्ट्र – ४२२००३
दिशा-निर्देश
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