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त्र्यंबकेश्वर मंदिर
मंदिर

त्र्यंबकेश्वर मंदिर

बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक, गोदावरी नदी का उद्गम स्थल.

5:30 AM – 9:00 PM अभी खुला
तीन मुखों वाला अद्वितीय शिवलिंग: अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग, यहाँ का मुख्य शिवलिंग तीन मुखों वाला है। ये तीन मुख हिंदू धर्म के त्रिदेव अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु और शिव (महेश) के प्रतीक माने जाते हैं।
- गोदावरी नदी का उद्गम स्थल: त्र्यंबकेश्वर मंदिर ब्रह्मगिरी पर्वत की तलहटी के पास स्थित है। ब्रह्मगिरी पर्वत को पवित्र गोदावरी नदी का उद्गम स्थल माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह नदी पवित्र कुशावर्त कुंड से होकर प्रवाहित होती है।
- वास्तुकला: तीसरे पेशवा बालाजी बाजीराव ने 18वीं शताब्दी में (ईस्वी 1740 से 1760 के बीच) इस मंदिर का निर्माण करवाया था। काले बेसाल्ट पत्थर से निर्मित यह मंदिर पारंपरिक हेमाडपंथी और नागर स्थापत्य शैली में बनाया गया है।
- रत्नजड़ित मुकुट: यहाँ के शिवलिंग पर स्वर्ण मुखौटा और एक ऐतिहासिक रत्नजड़ित मुकुट सुशोभित है। इस मुकुट में कीमती हीरे और पन्ने जड़े हुए हैं। प्रत्येक सोमवार को शाम 4:00 बजे से 5:00 बजे तक इस मुकुट को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए प्रदर्शित किया जाता है।
प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान एवं पूजाएँ
श्रद्धालु त्र्यंबकेश्वर में विशेष वैदिक अनुष्ठान और पूर्वजों की शांति के लिए धार्मिक विधियाँ करवाने आते हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- कालसर्प दोष निवारण / कालसर्प योग पूजा
- नारायण नागबली
- त्रिपिंडी श्राद्ध
- रुद्राभिषेक
त्र्यंबक, नासिक
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